अपने हित
🔹1 अपने हित को छोड़कर किसी और कार्य में लगना मूर्खता है।
🔹2 हम यहाँ नाम कमाने नहीं,कर्म जलाने आये हैं।
🔹3 अपने को ज्यादा समझदार समझने वाले अक्सर संसार ही बढ़ाते हैं।
🔹4 लोकिक चतुराई अर्थात चारगति की कमाई।
🔹5 मूर्खों से होड़ मत लगाओ बल्कि ज्ञानियों के पीछे लग जाओ।
🔹6 रत्नत्रय सी सम्पत्ति नहीं और मिथ्यात्व सी विपत्ति नहीं।
🔹7 भोग अच्छे नहीं है इनमें सिर्फ पछतावा है।
🔹8 होनहार का विचार ही समता का आधार है।
🔹9 जो समय खोते हैं वे सिर्फ रोते हैं।
🔹10 शिकायत सुधार के लिए हो किसी को नीचा दिखाने नहीं।
(श्रेणिक जैन जबलपुर


