श्री बिषापहर स्तोत्र मंडल विधान एवं गुरुबाणी मंथन शिविर। दिनांक 29-30 अप्रैल एवं 01-02 मई 2025 । अधिक जाननेकेलिए 'आयोजन' (Event ) पेज में क्लिक करे

सारांश

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भारत वर्ष में श्री सम्मेदशिखरजी सिद्धक्षेत्र के बाद द्वितीय स्थान प्राप्त सिद्धक्षेत्र सोनागिरजी का नाम बड़े श्रद्धा और भक्ति से लिया जाता है यह अद्वितीय तीर्थ सिद्ध क्षेत्र सोनागिरजी अति प्राचीन काल से अवस्थित है जिसका प्राचीन नाम 'स्वर्णगिरि' व 'श्रमणगिरि' भी है।

यह सिद्धक्षेत्र अत्यंत मनोरम, सुन्दर, सहज, सरलता लिए हुए पवित्र रजकणों से निर्मित्त अनेक शासनों की कला कृति से 132 एकड़ क्षेत्र में विस्तार लिये हुए अद्वितीय और अनुपम है।

वर्तमान कालीन चौबीस तीर्थकरों में आठवें तीर्थंकर श्री 1008 चन्द्रप्रभ भगवान के सत्रहबार समवशरण से पवित्र है तथा निर्वाण काण्ड के अनुसार यह श्री नंग कुमार, अनंग कुमार, चिन्तागति, पूर्णचन्द्र, अशोक सेन, श्री दत्त, स्वर्ण भदादि साढ़े पाँच करोड़ मुनिवरों की मुक्ति स्थली रही है।

श्री ज्ञानार्णव ग्रन्थ के रचयिता श्री शुभचन्द्राचार्य एवं श्री भर्तृहरि मुनिराज की साधना स्थली स्वरूप यह सोनागिर सिद्धक्षेत्र अत्यन्त स्वच्छ एवं पवित्र है।

मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित सोनागिर पर्वतराज पर शिखर वद्ध अत्यंत मनोरम गगनचुम्बी 77 जिन मंदिर है, जिसमें 82 खड्‌गासन और 85 प‌द्मासन-इस प्रकार कुल 167 जिनबिम्ब विराजमान हैं।

पर्वतराज पर मन्दिर क्रमांक 57 में सम्वत् 1335 में प्रतिष्ठित भगवान चन्द्रप्रभ स्वामी की 11 फीट उतंग खड्‌गासन प्रतिमा जो कि पर्वत के पाषाण पर ही उकेरी गई अति मनोज्ञ भाववाही वीतरागी जिन प्रतिमा है जिसके समक्ष बैठकर ध्यान लगाने पर उठने का ही मन नहीं होता।

उसी के एक बाजु में भगवान शीतलनाथ जी एवं एक बाजु में श्री पार्श्वनाथ स्वामी की 8-8 फीट ऊँची पाषाण की अति प्राचीन प्रतिमा विराजमान है। तथा पर्वतराज पर ही मंदिर क्रमांक 57 के. सामने चौक में वीच में श्री 1008 भगवान बाहुबली स्वामी एवं आजु वाजु श्री नंग कुमार स्वामी श्री अनंग कुमार स्वामी की प्रतिमा एवं जिनमंदिर है। तथा सामने विशाल मानस्तंभ श्री चौबीस तीर्थंकर के मंदिर एवं समवशरण मंदिर तथा बीच पर्व पर विशाल नंदीश्वर जिनालय है।

पर्वतराज पर ही वाजनी शिला, नारियल कुण्ड, व अनेक क्षत्रियाँ एवं ध्यान की अनेक गुफायें निर्मित्त है, सम्पूर्ण पर्वतराज की वन्दना 2 से 3 घण्टे में एवं पर्वतराज की परिक्रमा मात्र एक घन्टे में भाव सहित पूर्ण की जाती है।

पर्वतराज की तलहटी में भी विशाल शिखर वद्ध 31 जिनमंदिर है इस प्रकार कुल 108 जिनालय है तलहटी में ही यात्रियों की सुविधार्थ सर्व सुविधा युक्त अनेक छोटी-बड़ी धर्मशालाएँ बनी हुई है। जिसमें परमागम मंदिर एवं श्री कुन्दकुन्द नगर की अनुपमा रचना है

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श्री परमागम मंदिर (नं.-21) सिद्धक्षेत्र सोनागिर की तलहटी में स्थित मंदिर क्रमांक 21, श्री नंग-अनंग दिगम्बर जैन परमागम मंदिर में मूलनायक श्री 1008 चन्द्रप्रभ भगवान की साढ़े पाँच फीट उत्तंग पदमासन की प्रतिमा विराजमान है साथ में विधि नायक श्री आदिनाथ भगवान की धातु की प्रतिमा विराजमान है जहाँ प्रतिदिन श्री जिनेन्द्र भगवंतों के दर्शन, पूजन के साथ-साथ वीतरागवाणी का लाभ स्वाध्याय के माध्यम से सभी जीवों को प्राप्त होता है।

परमागम मंदिर की दीवालो पर चारों तरफ मार्बल पर उकेरे गए श्री पंच परमागम, श्री तत्त्वार्थसूत्र, श्री रत्नकरण्ड ग्रावकाचार श्री भक्तामर स्तोत्र आदि लिपिवद्ध है तथा चारों तरफ काँच की अभूतपूर्व कलाकारी है इसीलिए इसे काँच मंदिर भी कहते है

आत्माराधना एवं जिनशासन की मंगलमय प्रभावना युगों-युगों तक होती रहे इस पवित्र भावना के फलस्वरूप जैनरत्न' वाणीभूषण पं. ज्ञानचन्दजी विदिशा की मंगलप्रेरणा से सेठ श्री माणिकचन्दजी सर्राफ मौ (भिण्ड) द्वारा प्रदत्त भूमि पर नवम्बर 1987 में शुभमुहुँत में श्री परमागम मॉदर का शिलान्यास हुआ और शीघ्र ही विशाल भव्य जिनमंदिर का निर्माण होकर फरवरी 1995 में ऐतिहासिक श्री आदिनाथ पंचकल्याणक महोत्सव फाल्गुन शुक्ल सप्तमी को श्री चन्द्रप्रभ स्वामी के निर्वाण कल्याणक के पवित्र दिन ही श्री 1008 चन्दप्रभ प्रतिष्ठा स्वामी की अतिशय युक्त अत्यन्त विशाल एवं मनोज प्रतिमा श्री परमागम मंदिरजी में विराजमान

हुई उस दिन से लेकर आज तक यहाँ सहस्त्रों मण्डल विधान, आध्यात्मिक शिविर, आध्यात्मिक तत्त्व संगोष्ठी आदि के माध्यम से जिनशासन की मंगलमय प्रभावना होती आ रही है श्री परमागम मंदिर में बाहर से विशाल शिखर बद्ध व आकर्षक गुम्मचों सहित सुन्दर कलाकृति से उकीर्ण क्रीम कलर के पाषाण से सुसज्जित और अन्दर में आचार्य कुन्दकुन्द देव द्वारा विरचित परमागम ग्रन्थों सहित चारों अनुयोग के प्रन्थों की गाथाएँ धबल पाषाण पर उत्कीर्ण है। वही प्रथमानुयोग में वर्णित पुराण पुरुषों की प्रेरणास्पद चित्रावली ऊपर की ओर चारों तरफ सुन्दर काँध से जड़ी हुई है। इसी के साथ जिनधर्म से सम्बन्धित चित्रावली व जिन वचन अत्यन्त सुन्दर काँच के कार्य से पूरा परमागम मंदिर जगमग - जगमग हो रहा है।

श्री परमागम मंदिर जी में प्रतिदिन सैकड़ों साधर्मोजन जिनदर्शन पूजन करने आते है और प्रतिदिन प्रातःकाल विद्वानों द्वारा शास्त्र-स्वाध्याय का लाभ लेते हैं, शाम को जिनेन्द्रभक्ति होती है तथा समय-समय पर भक्ति संगीत के साथ मण्डल विधान आध्यात्मिक शिविर में अनेक विशिष्ट विद्वानों के प्रवचन से विशेष मंगलमय प्रभावना होती है।

श्री कुन्दकुन्द कहान नगरः एक वृहद् आध्यात्मिक सङ्कलः-

सिद्धक्षेत्र सोनागिरजी के स्वर्णिम इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय तब जुड़ गया जब तीन लाख स्क्वायर फीट की विशाल भूमि पर पूज्य गुरुदेवश्री कानजी स्वामी के पुण्य प्रभावना योग से श्री परमागम श्रावक ट्रस्ट, सोनागिर के अन्तर्गत श्री कुन्दकुन्द कहान नगर में विशाल आध्यात्मिक सङ्कल की मनोरम रचना हुई। जिसमें निम्न प्रकार की संरचना हुई।

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1. श्री बाहुबली जिन मंदिर :- परिसर के एक बडे भाग में विशुद्ध जिनायतनों की भव्य संरचना की गई है आकर्षक पंचतीर्थ द्वार से प्रवेश करने पर उन्नत विशाल श्री बाहुवली भगवान के दर्शन होते है। जमीन से 25 फीट ऊँचाई पर 30/35 फीट के श्वेत धवल पाषाण निमित्त चौक में खुले आकाश में भव्य कमलासन पर 18 फीट उत्तंग रूप से आत्माराधक महातपस्वी श्री 1008 बाहुबली स्वामी विराजमान है।

2. पंच तीर्थ की मनोरम रचना :- वर्तमान कालीन श्री ऋषभादि चौबीस तीर्थंकरों की निर्वाण स्थली रूप पंचतीर्थ की मनोहारी रचना इसी परिसर में चारों ओर की गई है।

शाश्वत सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेदशिखरजी की रचना में आठवें तीर्थंकर श्री चन्द्रप्रभ भगवान का जिनमंदिर व तेईसवे तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ भगवान का जिनमंदिर के साथ 20 टोंको पर बीस तीर्थंकर के पावर चरण सिन्ह टोंको में विराजमान किये गये हैं।

Unable to load the picture इसप्रकार सम्पूर्ण पंचतीर्थ की रचना अत्यन्त व्यवस्थित रूप से की गई है। ऐसा लगता है मानों साक्षात् पंच निर्वाण क्षेत्रों की ही वंदना कर रहे हैं। इसी के साथ-साथ सम्पूर्ण पंचतीर्थ की सुन्दर सुलभ परिक्रमा का मार्ग भी बनाया गया है।

3. श्री बाहुबली ध्यान मंदिर :- श्री बाहुबली जिन मंदिर के नीचे 25 फिट ऊँचाई सहित 30×30 के प्राकृतिक गुफा स्वरूप श्री बाहुबली ध्यान मंदिर की ऐसी सुंदर रचना की गई है जिसमें बैठकर प्रतिदिन प्रातः 5 बजे से साधर्मीजन सामूहिक सामायिक करते हैं। बाह्य आलम्बन हेतु 4-5 फिट ऊँचा स्वर्णमयी घातु का 'हीं' की व भव ताप नाशक जिनवाणी की स्थापना की गई है।

4. श्री सरस्वती भवन :- पंचतीर्थ परिसर में प्रवेश करते ही दाई ओर दो मजिंला भवन श्री सरस्वती भवन के रूप में स्थापित है। इसमें व्यवस्थित रूप से सभी प्रकार का चारों अनुयोग का प्राचीन व नवीन सत्साहित्य रूप जिनवाणी विराजमान है। प्रतिदिन दोपहर को पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी का सी.डी. टेप प्रवचन व समागत विद्वत् वर्ग के प्रवचन का लाभ सभी साधर्मीजन यहाँ एक साथ बैठकर लेते हैं।

5. श्री महावीर स्वामी मानस्तंभ जिनमंदिर :-श्री पावापुर रचना में श्री महावीर स्वामी जिनमंदिर के सामने परिसर के बीचों बीच में अति उतंग धवल पाषाण संगपरमर का 57 फीट उत्तंग भव्य मानस्तंभ में ऊपर चर्तुमुखी पद्मासन एवं नीचे चतुर्मुख खद्‌गासन भगवान महावीर स्वामी जिन बिम्ब विरजमान हैं। श्री मानस्तंभ के नीचे तीनों कटनी के चारों तरफ आध्यात्मिक चित्रावली धवल मारवल पर उत्कीर्ण की गई है।

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6. श्री सीमंधर स्वामी समवशरण जिनमंदिर :- इसी परिसर में अति मनोहारी शिखरवद्ध श्री सीमंधर स्वामी समवशरण जिनमंदिर की रचना है जिसमें समवशरण की रचना के बीच में चतुर्मुखी श्री सीमंधरनाथ स्वामी विराजमान है और श्री कुन्दकुन्द स्वामी खड्‌गासन रूप में श्री सीमंधर स्वामी की वंदना करते हुए दिखलाई दे रहे हैं।

7. श्री कुन्दकुन्द-कहान आगम जिनमंदिर :-श्री समवशरण जिनमंदिर की बाई ओर पाँच हजार स्क्वायर फिट के विशाल भूमि में तीन विशाल शिखरवद्द सहित श्री आगम जिनमंदिर की भव्य रचना हुई है जिसमें नीचे एक भव्य स्वर्णमयी वेदी पर श्री विद्यमान बीस तीर्थंकर भगवंतों के बीस जिनबिम्ब और वेदी के आस-पास जिनवाणी व चार मुनिभगवंतों के चरण चिन्ह स्थापित हैं। इसी प्रकार ऊपर एक भव्य स्वर्णमयी वेदी पर भविष्य कालीन चौबीस तीर्थंकर भगवंतों के चौबीस मनोहारी जिनबिम्ब विराजमान हैं। और वेदी के आस-पास चार जिनवाणी व चार मुनि भगवंतों के चरण चिन्ह स्थापित हैं।

श्री आगम जिन मंदिर के विशाल भव्य हाल में चारों तरफ श्री मुनि भगवंतों के वाईस परिषहजय के सचित्र वर्णन सहित धवल पाषाण मार्वल पर उत्कीर्ण होकर लगाये गये है। इसी के साथ आचार्य कुन्दकुन्द देव रचित पंच परमागम की प्रमुख गाथाएं, श्री भानतुङ्ग स्वासी द्वारा रचित श्री भक्तामर स्तोत्र के 48 काव्य सचित्र लगाए गए हैं तथा श्रीमद् राजचन्द्रजी द्वारा रचित आत्मसिद्धि अपूर्व अवसर आदि, पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी के वचनामृत म पू. अहित श्री के वचनामृत आदि मार्बल पर उत्कीर्ण कर लगाये गये हैं तथा उपरोक्त सभी ज्ञानी महापुरुषों के चित्र भी लगाये गये हैं। विशेष अवसर पर इस आगम मंदिर में भक्ति संगीत के साथ मण्डल विधान, पूजा अर्चना आध्यात्मिक प्रवचन का लाभ एक साथ सभी साधमर्मीजनों को प्राप्त होता है।

8. तीर्थंकर महावीर भुत स्कन्ध मन्दिर :-दर्शनीय व अध्ययन करने योग्य श्री श्रुत स्कन्ध का मार्थल पर उकेरा हुआ दृश्य है। इसमें 12 अंग, 14 प्रकीर्णक के अलावा अन्य तीन 6×4 फुट के मार्बल पटल पर गुरु परम्परा, भूतकालीन, वर्तमान व भविष्य कालीन चौबीसी व वर्तमान विदेहक्षेत्र स्थित बीस तीर्थंकरों के नाम भी ऑकत हैं!

9. आचार्य कुन्दकुन्द विद्या निकेतन व छात्रावास :जीवंत भगवान बनने की फैक्ट्री यह विद्या निकेतन का भव्य शुभारम्भ जुलाई 2007 में हुआ। प्रतिवर्ष 10 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। कक्षा 6 से कक्षा 10 तक अंग्रेजी माध्यम से लौकिक अध्ययन हेतु दतिया के विशिष्ट विद्यालय में अध्ययन के साथ धार्मिक अध्ययन व नैतिक संस्कार के साथ जीवन निर्माण के लिए सङ्गुल में ही योग्य शास्त्री विद्वानों के द्वारा उत्कृष्ट शिक्षा दी V जाती है आवास व भोजन की सुन्दर व्यवस्था के साथ खेल कूद आदि का भी खुला स्थान है। अनेक बालक जीवन निर्माण कर रहे हैं। तथा एक सौ बीस छात्र अध्ययन करके धार्मिक समाजिक क्षेत्र में कार्यरत है।

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10. श्री कुन्दकुन्द-कहान स्वाध्याय मंदिर :-आचार्य कुन्दकुन्द नगर के मुख्य प्रवेश द्वार के बिल्कुल सामने ही श्रीमती मैनादेवी सेठी दिल्ली की प्रेरणा से श्री पवन जैन सैफ एक्सप्रेस परिवार दिल्ली के सौजन्य से अत्यंत विशाल एवं भव्य स्टेज सहित एक विशाल श्री कुन्दकुन्द कहान दिगम्बर जैन स्वाध्याय मंदिर का निर्माण हुआ है, सम्पूर्ण स्वाध्याय मंदिर को श्री सुशील सेठी दिल्ली के मार्गदर्शन में सुन्दर चित्र प्रोजेक्टर सहित आधुनिक पद्धाति से सजाया गया है, जिसमें समय-समय पर आध्यात्मिक प्रवचन, शिविर, गोष्ठी आदि होती रहती है।

11. श्री कुन्दकुन्द-कहान सत्साहित्य विक्रय केन्द्र :-प्रमुख गेट के पास ही सुन्दर सुसाज्जित श्री सत्साहित्य विक्रय केन्द्र की स्थापना की गई है। यहाँ पर चारों अनुयोगों के सत्साहित्य के साथ पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी व बाल ब्र. श्री रविन्द्रजी आत्मन् द्वारा रचित सत्ाहित्य व सी. डी. प्रवचन के केसिट महापुरुषों के फोटू भी उपलब्ध रहते हैं।

12. श्री श्रावक औषद्यालय :-प्रमुख गेट के पास ही ट्रस्ट द्वारा संचालित पारमार्थिक धर्मार्थ औषद्यालय का संचालन अनेक वर्षों से हो रहा है जिसमें अनुभवी वैद्य डॉ. द्वारा सभी आने बाले यात्रियों के साथ स्थानीय जैन-अजैन गरीय-अमीर सभी जीवों को निःशुल्क दया देकर यथोचित उपचार कर परोपकार का पुण्य कार्य किया जाता है।

13. श्री श्रावक भोजनालय :-सिद्धक्षेत्र सोनागिर आकर सभी साधमर्मीजन तीर्थ वन्दना, पूजा, प्रवचन आदि का पूर्ण लाभ निश्चित होकर ले सके इसके लिए श्री परमागम श्रावक ट्रस्ट द्वारा संचालित शुद्ध भोजन की व्यवस्था प्रतिदिन दोनों समय रहती है। इसके लिए एक विशाल हाल ग्रेनाईट से सुसज्जित व्यवस्थित रूप से निर्मित किया गया है। यहाँ सूर्यास्त पूर्व भोजन रहता है एवं जमीकन्द आदि अभक्ष्य पदार्थों का सेवन निषिद्ध है। तथा अष्टमी चतुर्दशी को हरी सब्जी का प्रयोग नहीं होता है।

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14. श्री कुन्दकुन्द-कहान विद्वत् अतिथिगृह :-इसी सङ्कल में तीनमर्जित सुव्यवस्थित विद्वत् अतिथिगृह का निर्माण किया गया है जिसमें आने वाले विद्वत्जनों के लिए कुल 7 फ्लैट्स बनाये गये हैं।

15. श्री समन्तभद्र निलय व श्री धरसेन निलय गेस्ट हाऊड :- विशाल सङ्कल में ही दी ब्लाकों में 4-4, कुल 8 गेस्ट हाऊस का सर्व सुविधायुक्त निर्माण किया गया है। प्रत्येक गेस्ट हाऊस में 1 हॉल, 2 शयन कक्ष, 1 किचन, 2 प्रसाधन व दोनों तरफ गेलरी अटेय है।

16. श्री कुन्दकुन्द अतिथि गृह :- शाल दो मंजिल अतिथि गृह जिसमें नीचे-ऊपर मंजिल में 16-16 कुल 32 फ्लेट्स हैं। इसके अतिरिक्त भोजनशाला के ऊपर भी 11 फ्लेट्स आवास हेतु निर्मित किये गये हैं। विशेष कार्यक्रम हेतु एक मीटिंग हाल है। विशेष यात्रा संघ आने पर "अमृत विश्रांति कक्ष" के रूप में बड़ा हाल का निर्माण भी किया गया है। विद्वत् अतिथि गृह एवं श्री कुन्दकुन्द अतिथिगृह के बीच में बाहर टीन शेड भी है जिसमें बाहर से आने वाले यात्रा संघ के लिए रसोई बनाने का स्थान निर्मित है।

इसी प्रकार बाहर पार्किंग के लिए एवं यात्रा संघ आदि के लिए स्वतंत्र रूप से एक साथ भोजन कराने के लिए पाडोल आदि लगने के लिए बहुत बड़ा खुला स्थान है।

17. श्री रत्नत्रय निलय :- मुख्य गेट के प्रवेश करते ही विशाल रत्नत्रय भवन का निर्माण किया गया है। इसमें चार विशिष्ट गेस्ट हाऊस व चौदह फ्लेट्स सर्व सुविधा युक्त हैं।

18. श्री परमागम आवक ट्रस्ट कार्यालय :- श्री परमागम श्रावक ट्रस्ट का कार्यक्रम इसी संकुल में सर्व सुविधा युक्त व्यवस्थित रूप से बना हुआ है। जिसमें कम्प्यूटर आदि का पूर्ण व्यवस्था सहित मैनजर आदि बैठते हैं।

19. श्री 'आत्पन्' निलय :- श्री कुन्दकुन्द कहान आगम मंदिर के पास में ही ट्रस्ट की विशाल भूमि है। इसी केएक हिस्से में सुन्दर सुव्यवस्थित दो मर्जिल भवन" श्री आत्मन् निलय" का निर्माण हुआ है जिसमें त्यागी, व्रती, ग्र. भाईयों व व्र. विद्वानों के निवास हेतु अत्यंत सादगीमय, स्वच्छ वातावरण के लिए आवश्यक साधन सहित इसका निर्माण किया गया है।

आध्यात्मिक कार्यक्रमों का प्रमुख स्थान :-

श्री कुन्दकुन्द-कहान नगर सङ्कल में स्थाई रूप से निवास करने वाले और समय-समय पर वाहर गांव से आने वाले साधर्मी भाई बहिनों को प्रतिदिन होने वाले आध्यात्मिक कार्यक्रम का लाभ सहज ही प्राप्त होता है।

ट्रस्ट के अन्तर्गत वार्षिक कार्यक्रमों में फरवरी माह में वार्षिकोत्सव एवं युवा शिविर, मार्च माह में फाल्गुन अष्टान्हिका पर्व महोत्सव अप्रैल माह में श्री कानजी स्वामी जयंती (उपकार दिवस) पर गुरुवाणी मंथन शिविर जुलाई माह में आषाढ़ अष्टान्हिका पर्व महोत्सव सितम्बर माह में श्री दशलक्षण पर्व महोत्सव, अक्टुबर माह में दशहरा अवकाश में युवा शिविर, नवम्बर माह में दीपावली निर्वाणोत्सव, नवम्बर माह में ही कार्तिक अष्टान्हिका पर्व महोत्सव तथा बीच-बीच में विविध साधर्मीजनों द्वारा विविध प्रंसगों जैसे जन्मदिवस, स्मृतिदिवस, विवाह वर्षगाठ आदि पर एक-एक दो-दो दिवस के कार्यक्रम होते है जिसमें पूरे भारत वर्ष से हजारों साधमर्मी/आत्मार्थी भाई-बहिन सम्मिलित होकर अपूर्व धर्म लाभ लेकर अपने को धन्य मानते हैं।

प्रतिदिन और विशेष कार्यक्रमों के समय भी पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी के सी.डी. प्रवचन प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रतिदिन चलते हैं।

श्री परमागम मंदिर व श्री कुन्दकुन्द कहान सकूल के प्रेरणा स्रोत व मार्गदर्शक जैनरत्न वाणी भूषण पण्डित श्री ज्ञानचन्दजी विदिशा वालों के सङ्कल निर्माण में प्रारम्भ से ही स्थाई रूप से सिद्धक्षेत्र सोनागिर में निवास कर सभी आध्यात्मिक कार्यक्रमों के मार्गदर्शन के साथ प्रतिदिन आध्यात्मिक प्रवचन का लाभ सभी को प्राप्त होता रहा है,

इसी के साथ यहाँ स्थाई रूप से निवास करने वाले सहकोषाध्यक्ष ट्रस्टी श्री पं. केशरीमलजी पाटनी ग्वालियर वाले प्रतिदिन प्रातः श्री परमागम मंदिर में अध्यात्मिक प्रवचन करते हैं और ट्रस्ट की समस्त गतिविधियों में निस्वार्थ भाव से अपना योगदान प्रदान करते हैं। तथा विशेष कार्यक्रमों में देश के उच्च कोटि के आध्यात्मिक विद्वानों के प्रवचन का लाभ प्राप्त होता है।

प्रतिदिन चलने वाले आध्यात्मिक दैनिक कार्यक्रमः
प्रात: 5 बजे से 5:45 बजे तक सामयिक पाठ, ध्यान सूत्र, जाप आदि (ध्यान मंदिर में)
प्रातः 7 बजे से 8 बजे तक श्री जिनेन्द्र प्रश्वाल व नित्य नियम पूजन।
प्रातः 8 बजे से 9 बजे तक आध्यात्मिक प्रवचन (परमागम मंदिर में)
दोप.: 2:30 बजे से 3:30 बजे तक पू. गुरुदेव श्री सी.डी. प्रवचन (सरस्वती भवन में)
दोप.: 3:30 बजे से 4:30 बजे तक आध्यात्मिक प्रवचन (सरस्वती भवन में)
रात्रि 7 बजे से 8 बजे तक श्री जिनेन्द्र भक्ति (आगम मंदिर में)
रात्रि 8 बजे से 9 बजे तक आध्यात्मिक प्रवचन (सरस्वती भवन में)

श्री नगं-अनंग दि. जैन परमागम मंदिर व श्री कुन्दकुन्द-कहान नगर सङ्कुल के विकास के प्रमुख सहयोगी गण/महानुभाव के हम आभारी है और सदा रहेगे।

सन् 1987 से श्री परमागम मंदिर के शिलान्यास से लेकर आज तक जो संरचना और विकास हुआ उसके प्रेरणास्रोत व मार्गदर्शक स्मृतिशेप वाणीभूषण पं. ज्ञानचन्दजी विदिशा का पूरा समर्पण रहा तथा संस्थापक अध्यक्ष स्मृतिशेष श्रीमान् पूनमचन्दजी सेठी दिल्ली व स्मृति शेष श्री मांगीलालजी पहाड़िया इन्दौर वालों का पूर्ण समर्पण रहा है।

इसी के साथ स्व. मानकचन्दजी सेठ माँ, स्व. श्री चम्पालालजी ग्वालियर, श्री चन्द्रसैनजी जैन दिल्ली, स्व. श्री इन्द्रसैनजी दिल्ली, श्री नेमीचन्दजी पहाड़िया, श्री पुखराजजी पहाड़िया पीसांगन, श्री बृजमोहनलालजी, मनीषजी पौद्दार हरिद्वार, श्री डॉ. आर. के. जैन, डॉ. वासंतीबेन शाह मुम्बई, लाला अभिनंदन प्रसादजी सहारनुपर, श्रीमती शोभनाबेन अश्विनभाई मेहता मुम्बई, श्री अनंतभाई ए. सेठ मुम्बई, श्रीनेमिशभाई शाह मुम्बई, श्री बसंत लाल एम. दोशी मुम्बई, श्री दुलीचन्दजी खैरागढ़, सौ. मजूला कविन परीख मुम्बई, श्री शांतिभाई जवेरी मुम्बई, श्री रहतुमलजी दिल्ली आदि अनेको श्रेष्ठी वर्ग के साथ विद्वत् वर्ग में सर्व श्री राजमलजी पवैया भोपाल, श्री पं. जवाहरलालजी विदिशा, श्री पं. लालजीरामजी विदिशा, श्री पं. मांगीलालजी कोलारस, श्री पं. पूरनचन्द्रजी मौ, श्री श्यामलालजी विजयवर्गीय ग्वालियर श्री बंसतजी बडजात्या ग्वालियर, डॉ. विनोद 'चिन्मय' शास्त्री विदिशा एवं डॉ. मुकेश' तन्मय' शास्त्री विदिशा आदि अनेक विद्वानों का सहयोग सदैव प्राप्त होता रहा है।

देश-विदेश के समस्त साधर्मी श्रेष्ठीजनों के सहयोग से इस संस्था का इतना विकास हुआ है और निरन्तर हो रहा है। आध्यात्मिक गति विधियों के कारण इस संस्था का नाम मात्र सिद्धक्षेत्र सोनागिर में ही नहीं देश-विदेश में सभी जगह है।

जो भी साधमर्मीजन एक बार सिद्धक्षेत्र सोनागिर में तीर्थ यात्रा हेतु आते है और श्री कुन्दकुन्द कहान नगर में सुरम्य वातावरण में रहकर अध्यात्म का अपूर्व आनंद लेते है तो उन्हें अपूर्व आनंद प्राप्त होता है और बार-बार आने का मन होता है।

आप भी यदि अबतक यहाँ नहीं आ पाये हो तो एक बार अवश्य पधारे। आपका हार्दिक स्वागत.... अभिनंदन है। पूर्व सूचना फोन पर अवश्य देवें जी। जिससे आपके आवास एवं भोजन की समुचित व्यवस्था की जा सके।

कैसे पहुँचे सिद्धक्षेत्र सोनागिरि....?

ग्वालियर झाँसी मार्ग पर स्थित है।
आगरा से सोनागिरि 200 कि.मी.
ग्वालियर से सोनागिरि 65 कि.मी.
दतिया से सोनागिरि 12 कि.मी.
झाँसी से सोनागिरि 45 कि.मी.

सोनागिरि रेल्वे स्टेशन क्षेत्र से 3 कि.मी. दूरी पर है।

दिल्ली एवं मुम्बई से आने वाली सभी एक्सप्रेस गाड़ियाँ झाँसी एवं दतिया रूकती है।

संस्था के विकास हेतु आपके सुझाव व मार्गदर्शन अपेक्षित है। सिद्धक्षेत्र पर दान देकर अपने धन का सदुपयोग कर अनेकों भव्य जीवों को धर्म मार्ग में लगाने की प्रेरणा प्रदान करते हुये सतिक्षय पुण्य का सचंय करें।

दान देय मन हरष विशेष, यह भव यश, पर भव सुख देखेः क्षेत्र के उत्तरोतर विकाश हेतु आप चारों प्रकार के दान में निम्न प्रकार से सहयोग प्रदान कर सकते है:

1. परम शिरोमणि सरंक्षक रु.1100000/-
2. शिरोमणि संरक्षक रु.500000/-
3. आचार्य कुन्दकुन्द विद्यानिकेतन सोनागिर में एक विद्यार्थी गोद हेतु परसम सरंक्षक सदस्य रु.251,000/-
छात्रावास के सरंक्षक हेतु एक छात्र की 5 वर्ष की पढ़ाई हेतु सहयोग राशि रु.1,25,000/-
एक विद्यार्थी की एक वर्ष गोद हेतु सहयोग राशि रु.25,000/-
4. छात्रावास में ध्रवफण्ड हेतु सहयोग राशि रु.11,000/-
5. छात्रो के एक दिन भोजन आदि की सहयोग राशि रु.5,100/-
6. पंचतीर्थ जिनमंदिर, बाहुवली मंदिर, आगम मंदिर एवं समवशरण मंदिर हेतु पूजन तिथि सहयोग राशि रु.1,100/-
7. श्री परमागम मंदिर हेतु पूजन तिथि सहयोग राशि रु.500/-
8. श्री श्रावक भोजनालय हेतु सहयोग राशि रु.11,000/-
9. श्री श्रावक औषधालय ध्रवफण्ड सहयोग राशि रु.11,000/-
10. श्री श्रावक औषधालय में एक दिन का औषधदान रु.1,100/-
11. सत्साहित्य प्रकाशन हेतु ज्ञानदान सहयोग राशि रु.11,000/-
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अध्यक्ष : अनिल ‘सेठी’ जैन, बैंगलोर

वरिष्ठ उपाध्यक्ष : प्रदीप 'चौधरी' जैन, किशनगढ़ मो. 93520 11757
कोषाध्यक्ष : केशवदेव जैन, कानपुर मो. 094154-06458
प्रमुख संयोजक : सुशील 'सेठी' जैन, नई दिल्ली मो. 97113 08204
उपाध्यक्ष : आई.एस. जैन, मुम्बई मो. 98335 70056
सह-कोषाध्यक्ष : केशरीमल जैन 'पाटनी', सोनागिर मो. 99939 31033
महामंत्री : पदमकुमार जैन 'पहाड़िया', इन्दौर मो. 94250-54280
मंत्री : डॉ. मुकेश जैन 'शास्त्री', विदिशा मो. 94251-48507
जनकल्याण मंत्री : मोतीलाल जैन, खैरागढ़ मो. 94064 01800

संरक्षक :

सुभाष 'सेठी' जैन, कोलकाता,

पुखराज जैन 'पहाड़िया', अजमेर,

राहुल जैन 'गंगवाल', जयपुर

विनीत :

श्री परमागम श्रावक ट्रस्ट, सोनागिर
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श्री कुन्दकुन्द नगर, सिद्धक्षेत्र सोनागिर, जिला-दतिया (म.प्र.) 475685 फोन: 88274-17276, 9555876992